॥ श्री गणेशाय नमः ॥
ऋण मोचन गणेश स्तोत्र - RinMochan Ganesh Stotra
ऋण मोचन गणेश स्तोत्र भगवान गणेश को समर्पित एक प्रचलित स्तोत्र है, जिसमें ऋण से मुक्ति और भगवान गणेश की कृपा की प्रार्थना की जाती है। इस पेज पर दिए गए पाठ के आधार पर संपूर्ण संस्कृत पाठ, श्लोकवार सरल हिंदी अर्थ और शब्दार्थ दिया गया है।
नीचे पहले संस्कृत पाठ और उसके बाद प्रत्येक भाग का हिंदी अर्थ, स्रोत एवं सामान्य प्रश्न दिए गए हैं।
इस पेज पर क्या है?
संपूर्ण ऋण मोचन गणेश स्तोत्र का संस्कृत पाठ
श्री गणेशाय नमः —
रक्ताङ्गं रक्तवस्त्रं सितकुसुमगणैः पूजितं रक्तगन्धैः
क्षीराब्धौ रत्नपीठे सुरतरुविमले रत्नसिंहासनस्थम्।
दोर्भिः पाशाङ्कुशेष्टाभयधरमतुलं चन्द्रमौलिं त्रिणेत्रं
ध्यायेच्छान्त्यर्थमीशं गणपतिममलं श्रीसमेतं प्रसन्नम्॥
स्मरामि देवदेवेशं वक्रतुण्डं महाबलम्।
षडक्षरं कृपासिन्धुं नमामि ऋणमुक्तये॥ १॥
एकाक्षरं ह्येकदन्तमेकं ब्रह्म सनातनम्।
एकमेवाद्वितीयं च नमामि ऋणमुक्तये॥ २॥
महागणपतिं देवं महासत्त्वं महाबलम्।
महाविघ्नहरं शम्भोर्नमामि ऋणमुक्तये॥ ३॥
कृष्णाम्बरं कृष्णवर्णं कृष्णगन्धानुलेपनम्।
कृष्णसर्पोपवीतं च नमामि ऋणमुक्तये॥ ४॥
रक्ताम्बरं रक्तवर्णं रक्तगन्धानुलेपनम्।
रक्तपुष्पप्रियं देवं नमामि ऋणमुक्तये॥ ५॥
पीताम्बरं पीतवर्णं पीतगन्धानुलेपनम्।
पीतपुष्पप्रियं देवं नमामि ऋणमुक्तये॥ ६॥
धूम्राम्बरं धूम्रवर्णं धूम्रगन्धानुलेपनम्।
होमधूमप्रियं देवं नमामि ऋणमुक्तये॥ ७॥
फालनेत्रं फालचन्द्रं पाशाङ्कुशधरं विभुम्।
चामरालङ्कृतं देवं नमामि ऋणमुक्तये॥ ८॥
इदं त्वृणहरं स्तोत्रं सन्ध्यायां यः पठेन्नरः।
गणेशकृपया शीघ्रमृणमुक्तो भविष्यति॥
॥ इति ऋण मोचन गणेश स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥
ऋण मोचन गणेश स्तोत्र का हिंदी अर्थ
ध्यान श्लोक का हिंदी अर्थ
मैं प्रसन्न और निर्मल भगवान गणपति का ध्यान करता हूँ, जिनका शरीर लाल वर्ण का है, जो लाल वस्त्र धारण करते हैं और लाल सुगंध से पूजित हैं। जो रत्नजटित आसन पर विराजमान हैं, जिनके हाथों में पाश और अंकुश हैं, जो अभय प्रदान करते हैं, जिनके मस्तक पर चंद्रमा सुशोभित है और जो त्रिनेत्रधारी हैं। यह ध्यान शांति की भावना से भगवान गणेश का स्मरण करने का वर्णन करता है।
- रक्ताङ्गम् — लाल वर्ण वाले अंगों से युक्त।
- रक्तवस्त्रम् — लाल वस्त्र धारण करने वाले।
- सितकुसुमगणैः — श्वेत पुष्पों के समूह से।
- रत्नसिंहासनस्थम् — रत्नजटित सिंहासन पर विराजमान।
- पाशाङ्कुशधरम् — पाश और अंकुश धारण करने वाले।
- अभयधरम् — अभय प्रदान करने वाले।
- चन्द्रमौलिम् — मस्तक पर चंद्रमा धारण करने वाले।
- त्रिणेत्रम् — तीन नेत्रों वाले।
श्लोक 1 का हिंदी अर्थ
मैं देवों के देव, वक्रतुण्ड और महाबली भगवान गणेश का स्मरण करता हूँ। वे कृपा के सागर हैं और षडक्षर स्वरूप माने गए हैं। मैं ऋण से मुक्ति के लिए उन्हें नमस्कार करता हूँ।
- स्मरामि — मैं स्मरण करता हूँ।
- देवदेवेशम् — देवताओं के देव और ईश्वर।
- वक्रतुण्डम् — वक्र सूंड वाले भगवान गणेश।
- महाबलम् — महान बल से युक्त।
- कृपासिन्धुम् — कृपा के सागर।
- ऋणमुक्तये — ऋण से मुक्ति के लिए।
श्लोक 2 का हिंदी अर्थ
मैं एकाक्षर स्वरूप, एकदंत, सनातन ब्रह्म और अद्वितीय भगवान गणेश को प्रणाम करता हूँ। उनसे ऋणमुक्ति की प्रार्थना की गई है।
- एकाक्षरम् — एक अक्षर के स्वरूप वाले।
- एकदन्तम् — एक दाँत वाले भगवान गणेश।
- ब्रह्म सनातनम् — सनातन ब्रह्मस्वरूप।
- एकमेवाद्वितीयम् — जो एकमात्र और अद्वितीय हैं।
- नमामि — मैं प्रणाम करता हूँ।
- ऋणमुक्तये — ऋण से मुक्ति के लिए।
श्लोक 3 का हिंदी अर्थ
मैं महागणपति का वंदन करता हूँ, जो महान सामर्थ्य और महान बल से युक्त हैं तथा बड़े-बड़े विघ्नों का नाश करने वाले हैं। मैं भगवान गणेश को ऋणमुक्ति की प्रार्थना के साथ नमस्कार करता हूँ।
- महागणपतिम् — महान गणपति।
- महासत्त्वम् — महान सामर्थ्य वाले।
- महाबलम् — महान बल से युक्त।
- महाविघ्नहरम् — बड़े विघ्नों को दूर करने वाले।
- शम्भोः — भगवान शम्भु अर्थात शिव से संबंधित।
- ऋणमुक्तये — ऋण से मुक्ति के लिए।
श्लोक 4 का हिंदी अर्थ
मैं कृष्ण वर्ण और कृष्ण वस्त्र धारण करने वाले, कृष्ण सुगंध से अभिषिक्त तथा कृष्ण सर्प को यज्ञोपवीत के रूप में धारण करने वाले भगवान गणेश को ऋणमुक्ति के लिए नमस्कार करता हूँ।
- कृष्णाम्बरम् — काले या कृष्ण वर्ण के वस्त्र धारण करने वाले।
- कृष्णवर्णम् — कृष्ण वर्ण वाले।
- कृष्णगन्धानुलेपनम् — कृष्ण वर्ण की सुगंध से लेपित।
- कृष्णसर्पोपवीतम् — कृष्ण सर्प को यज्ञोपवीत के रूप में धारण करने वाले।
- नमामि — मैं प्रणाम करता हूँ।
- ऋणमुक्तये — ऋण से मुक्ति के लिए।
श्लोक 5 का हिंदी अर्थ
मैं लाल वस्त्र धारण करने वाले, लाल वर्ण वाले, लाल सुगंध से युक्त और लाल पुष्पों को प्रिय मानने वाले भगवान गणेश को ऋणमुक्ति के लिए नमस्कार करता हूँ।
- रक्ताम्बरम् — लाल वस्त्र धारण करने वाले।
- रक्तवर्णम् — लाल वर्ण वाले।
- रक्तगन्धानुलेपनम् — लाल सुगंध से लेपित।
- रक्तपुष्पप्रियम् — लाल पुष्पों को प्रिय मानने वाले।
- देवम् — भगवान।
- ऋणमुक्तये — ऋण से मुक्ति के लिए।
श्लोक 6 का हिंदी अर्थ
मैं पीले वस्त्र धारण करने वाले, पीले वर्ण वाले, पीली सुगंध से युक्त तथा पीले पुष्पों को प्रिय मानने वाले भगवान गणेश को ऋणमुक्ति के लिए नमस्कार करता हूँ।
- पीताम्बरम् — पीले वस्त्र धारण करने वाले।
- पीतवर्णम् — पीले वर्ण वाले।
- पीतगन्धानुलेपनम् — पीली सुगंध से लेपित।
- पीतपुष्पप्रियम् — पीले पुष्पों को प्रिय मानने वाले।
- देवम् — भगवान।
- ऋणमुक्तये — ऋण से मुक्ति के लिए।
श्लोक 7 का हिंदी अर्थ
मैं धूम्र वर्ण और धूम्र वस्त्र धारण करने वाले, धूम्र सुगंध से युक्त तथा यज्ञ के धुएँ को प्रिय मानने वाले भगवान गणेश को ऋणमुक्ति के लिए नमस्कार करता हूँ।
- धूम्राम्बरम् — धूम्र वर्ण के वस्त्र धारण करने वाले।
- धूम्रवर्णम् — धूम्र या धूसर वर्ण वाले।
- धूम्रगन्धानुलेपनम् — धूम्र सुगंध से लेपित।
- होमधूमप्रियम् — होम के धुएँ को प्रिय मानने वाले।
- देवम् — भगवान।
- ऋणमुक्तये — ऋण से मुक्ति के लिए।
श्लोक 8 का हिंदी अर्थ
मैं ललाट पर नेत्र और चंद्रमा धारण करने वाले, पाश और अंकुश धारण करने वाले सर्वव्यापक भगवान गणेश को प्रणाम करता हूँ। जो चामर से अलंकृत हैं, उनसे ऋणमुक्ति की प्रार्थना की गई है।
- फालनेत्रम् — ललाट पर नेत्र वाले।
- फालचन्द्रम् — ललाट पर चंद्रमा धारण करने वाले।
- पाशाङ्कुशधरम् — पाश और अंकुश धारण करने वाले।
- विभुम् — सर्वव्यापक या महान प्रभु।
- चामरालङ्कृतम् — चामर से अलंकृत।
- नमामि ऋणमुक्तये — ऋणमुक्ति के लिए प्रणाम करता हूँ।
फलश्रुति का हिंदी अर्थ
जो मनुष्य संध्या के समय इस ऋणहर स्तोत्र का पाठ करता है, वह भगवान गणेश की कृपा से शीघ्र ही ऋण से मुक्त होने की प्रार्थित फलप्राप्ति का अधिकारी होता है।
- इदम् ऋणहरं स्तोत्रम् — यह ऋण को दूर करने वाला स्तोत्र।
- सन्ध्यायाम् — संध्या के समय।
- यः पठेत् नरः — जो मनुष्य इसका पाठ करता है।
- गणेशकृपया — भगवान गणेश की कृपा से।
- शीघ्रम् ऋणमुक्तः — शीघ्र ऋणमुक्त।
- भविष्यति — हो जाएगा / होगा।
स्तोत्र का स्रोत एवं परिचय
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| प्रचलित नाम | ऋण मोचन गणेश स्तोत्र / ऋण मोचन गणेश स्तुति |
| आराध्य देव | भगवान गणेश |
| मुख्य विषय | ऋणमुक्ति की प्रार्थना और भगवान गणेश की स्तुति |
| भाषा | संस्कृत |
| पाठ की संरचना | ध्यान श्लोक, मुख्य स्तुति और फलश्रुति |
| पाठांतर | इस स्तोत्र के विभिन्न प्रचलित पाठों में कुछ शब्दों और पंक्तियों में पाठांतर मिलते हैं। इस पेज पर दिए गए संस्कृत पाठ को उपलब्ध पाठ के आधार पर रखा गया है। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ऋण मोचन गणेश स्तोत्र क्या है?
ऋण मोचन गणेश स्तोत्र भगवान गणेश की स्तुति से संबंधित एक प्रचलित संस्कृत पाठ है, जिसमें ऋण से मुक्ति के लिए भगवान गणेश से प्रार्थना की गई है।
ऋण मोचन गणेश स्तोत्र किसके लिए पढ़ा जाता है?
इस स्तोत्र का पाठ मुख्य रूप से ऋणमुक्ति की प्रार्थना और भगवान गणेश की उपासना के उद्देश्य से किया जाता है।
ऋण मोचन गणेश स्तोत्र में क्या वर्णन किया गया है?
इसमें भगवान गणेश के विभिन्न स्वरूपों, वर्णों, आभूषणों और दिव्य गुणों का वर्णन करते हुए बार-बार ऋणमुक्ति के लिए प्रणाम किया गया है।
ऋण मोचन गणेश स्तोत्र का हिंदी अर्थ कहाँ पढ़ें?
इस पेज पर संस्कृत पाठ के बाद ध्यान श्लोक, प्रत्येक मुख्य श्लोक और फलश्रुति का सरल हिंदी अर्थ तथा प्रमुख शब्दों का अर्थ दिया गया है।
क्या इस स्तोत्र के अलग-अलग पाठ मिलते हैं?
हाँ, प्रचलित स्रोतों में कुछ शब्दों और पंक्तियों के पाठांतर मिल सकते हैं। इसलिए पाठ करते समय किसी विश्वसनीय प्रकाशित पाठ का अनुसरण करना उचित है।